त्राटक विधि

त्राटक का सामान्य अर्थ है 'किसी विशेष दृष्य को टकटकी लगाकर देखना'। मन की चंचलता को शान्त करने के लिये साधक इसे करता है। यह ध्यान की एक विधि है जिसमें किसी वाह्य वस्तु को टकटकी लगाकर देखा जाता है।

विधि- त्राटक के लिये किसी भगवान, देवी, देवता, महापुरुष के चित्र, मुर्ति या चिन्ह का प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा गोलाकार, चक्राकार, बिन्दु, अग्नि, चन्द्रमा, सूर्य, आदि दृष्य का भी प्रयोग किया जा सकता है। इसके लिए त्राटक केंद्र को अपने से लगभग ३ फीट की दूरी पर अपनी आंखों के बराबर स्तर पर रखकर उसे सामान्य तरीके से लगातार बिना पलक झपकाए जितनी देर तक देख सकें देखें। मन मे कोई विचार न आने दें। धीरे धीरे मन शांत होने लगेगा।


त्राटक के लिए प्रातःकाल का समय सर्वोत्तम है। यों उसे रात्रि को भी किया जा सकता है॥ दिन में सूर्य का प्रकाश फैला रहने से यह साधना ठीक तरह नहीं बन पड़ती हैं । यदि दिन में ही करनी हो तो अँधेरे कमरे का प्रबन्ध करना होता है।

साधना के लिए कमर सीधी, हाथ गोदी में, पालथी सही-रखकर बैठना चाहिए। वातावरण में घुटन दुर्गन्ध, मक्खी, मच्छर जैसे चित्त में विक्षोभ उत्पन्न करने वाली बाधाएँ नहीं हो। यह अभ्यास दस मिनट में आरम्भ करके उसे एक-एक मिनट बढ़ाते हुए एक दो महीने में अधिक से अधिक आधे घण्टे तक पहुँचाया जा सकता है। इससे अधिक नहीं किया जाना चाहिए ।

खुले नेत्र से प्रकाश ज्योति को दो से पाँच सेकेण्ड तक देखना चाहिए और आँखें बन्द कर लेनी चाहिए। जिस स्थान पर दीपक जल रहा है उसी स्थान पर उस ज्योति को ध्यान नेत्रों से देखने का प्रयत्न करना चाहिए। एक मिनट बाद फिर नेत्र खोल लिए जाय और पूर्ववत् कुछ सेकेण्ड खुले नेत्रों से ज्योति का दर्शन करके फिर आँखें बन्द कर ली जाय। इस प्रकार प्रायः एक-एक मिनट के अन्तर से नेत्र खोलने और कुछ सेकेण्ड देखकर फिर आँखें बन्द करने और ध्यान द्वारा उसी स्थान पर ज्योति दर्शन की पुनरावृत्ति करते रहनी चाहिए।


मिनटों और सेकेण्डों का सही निर्धारण उस स्थिति में नहीं हो सकता। घड़ी का उपयोग कर सकने की वह स्थिति होती ही नहीं। अनुमान पर ही निर्भर रहना पड़ता है। अलग समय में अनुमान के सही होने का अभ्यास घड़ी के सहारे किया जा सकता है। मोटा आधार यह है कि जब नेत्र बन्द कर लेने पर प्रकाश ज्योति का दर्शन झीना पड़ने लगे तो स्मृति को पुनः सतेज करने के लिए आँख खोलने और ज्योति देखने का प्रयत्न किया जाय। आमतौर ने नेत्र खोल कर देखने के उपरान्त जब पलक बन्द किये जाते हैं तो ध्यान में प्रकाश अधिक स्पष्ट होता है। धीरे-धीरे वह झीना धुँधला होता है। उसे फिर से सतेज करने के लिए ही खुली आँख से ज्योति देखने की आवश्यकता पड़ती है। हर मनुष्य की मस्तिष्कीय संरचना अलग-अलग प्रकार ही होती है। किसी को एक बार का प्रत्यक्ष दर्शन बहुत देर तक ध्यान में प्रकाश की झाँकी कराता रहता है। किसी की स्मृति जल्दी धुँधली हो जाती है। स्थिति का निरीक्षण स्वयं करना चाहिए और आवश्यकतानुसार जल्दी-जल्दी या देर-देर में आँखें खोलने बन्द करने का क्रम निर्धारण करना चाहिए। उद्देश्य यह है कि त्राटक के साधना काल में ध्यान भूमिका को लगातार प्रकाश ज्योति की झाँकी होती रहे। धुँधलेपन का हटाने के उद्देश्य से ही नेत्रों को खोलने, बन्द करने की प्रक्रिया अपनाई जाय।

अपनी हथेलियों पर जाने कौन सा ग्रह कहाँ बैठा है

सामुद्रिक शास्त्र हमारे अंगो की बनावट देखकर भविष्य बताने का विज्ञान है. इसमें न तो जन्म कुंडली की ज़रुरत पड़ती है और न ही माथापच्ची करने की सिर्फ हमारे बाहरी शरीर को देखकर भविष्य का अनुमान लगाया जा सकता है.
हमारे में हाथ की रेखाओं व उभरे हुए भागों से भी हम यह पता लगा सकते हैं. हमारी हथेलियों में उँगलियों के नीचे के भाग को पर्वत कहा गया है। इन्हीं पर्वतों के द्वारा जातक के स्वभाव की विशेषताएँ भी मालूम होती हैं।
बुध क्षेत्र : किनारे की सबसे छोटी उँगली के नीचे के उभरे भाग को बुध क्षेत्र कहते हैं। बुध का स्वभाव दृष्टि सजग रखने का है। बुध क्षेत्र के उभरे भाग वाले व्यक्ति यात्रा अधिक करते हैं। ऐसे व्यक्ति वाक्‌शक्ति से प्रखर होते हैं।
उनसे बैटन में जीतना आसान नहीं होता. परन्तु उनका मन अस्थिर रहता है। व्यापार-व्यवसाय में यह पर्वत लाभ दिलवाता है। इस पर्वत पर खड़ी तीन रेखाएँ हों तो व्यक्ति चिकित्सकीय क्षेत्र में यश पाता है। दबा हुआ पर्वत विवेकहीनता प्रकट करता है। यानि वो इन्सान जल्दिबदी में कुछ भी निर्णय ले लेता है और बाद में पछताता है

शुक्र क्षेत्र : अँगूठे के मूल से जीवन रेखा तक फैले भाग को शुक्र पर्वत कहते हैं। पर्वत ऊँचा हो तो व्यक्ति का स्वास्थ्य, सौंदर्य, प्रेम, संतान सुख में मदद मिलती है। ऐसा व्यक्ति दयावान, कला-संगीत प्रेमी होता है। अति विकसित पर्वत व्यक्ति के प्रेम संबंधों की ओर संकेत करता है। सपाट-समतल पर्वत व्यक्ति में आध्यात्मिकता की तरफ झुकाव बताता है ( साधू सन्यासियों के हाथों में ये ज़रूर मिलेगा. ) यदि पर्वत स्त्री के हाथ में बहुत उभरा हो तो काम का प्रतीक होता है। स्त्री बहुत कामुक परवर्ती की होगी
शनि क्षेत्र : मध्यमा के मूल में हृदय रेखा तक फैले क्षेत्र को शनि पर्वत कहते हैं। शनि पर्वत यदि उभरा हुआ तो व्यक्ति एकांतप्रिय, भाग्यवादी, गंभीर, दूरदर्शी, आध्यात्मिक और परिश्रमी होता है। उच्च पर्वत वाले गंभीर स्वभाव के होते हैं। प्रतिफल न मिले तो ये ज्यादा चिढ़ जाते हैं। शंकाशील स्वभाव के कारण पारिवारिक व्यक्तियों के साथ संबंध स्थापित नहीं कर सकते। अधिक उभरे पर्वत व्यक्ति को उदासीन, अध्यात्मवादी और दार्शनिक बनाता है।

सूर्य क्षेत्र : अनामिका (रिंग फिंगर ) के नीचे का क्षेत्र सूर्य क्षेत्र कहलाता है। अगर ये समान उभार वाला हो तो व्यक्ति दार्शनिक, बौद्धिक, विद्वान, लेखक, वक्ता, धर्मगुरु होता है। और यदि सूर्य क्षेत्र दबा हुआ हो तो मंदबुद्धि और ख्यातिविहीनता प्रकट करता है। सूर्य पर्वत क्षेत्र पर यदि तीन खड़ी रेखाएँ हों तो उसे अत्यंत शुभ माना जाता है। सूर्य क्षेत्र में इन आड़ी रेखाओं को अच्छा नहीं माना जाता है। ऐसी दशा अस्वस्थता प्रकट करती है
चंद्र क्षेत्र : मणिबंध के ऊपर और हथेली के बाएँ भाग के नीचे का क्षेत्र चंद्र क्षेत्र कहलाता है। चंद्र पर्वत वाले व्यक्ति कल्पनाशील, संवेदनशील, कवि, कलाकार, सौंदर्यप्रेमी और साहित्यकार होते हैं। यह गंभीर क्षेत्र मानसिक चिंता और चंचल बुद्धि प्रकट करता है। इस क्षेत्र में कोई रेखा शुक्र पर्वत तक पहुँच गई हो तो विदेश यात्रा के योग बनते हैं। इसी प्रकार इस क्षेत्र में यदि मंगल द्वितीय तक पहुँचने वाली रेखा हो तो विदेश यात्रा का योग बताती है।
गुरु पर्वत का संबंध उंगली के प्रकार से भी होता है। यदि उभरे गुरु पर्वत वाले व्यक्ति की तर्जनी के लंबी हो तो उसमें लापरवाही के अवगुण आ जाते हैं। ऐसे लोग तानाशाह प्रवृति के भी हो सकते हैं। वैसे तर्जनी के छोटी होने पर ऐसा नहीं होता है। उंगली के विकृत होने की स्थिति में वह व्यक्ति काफी धूर्त, पाखंडी या चालाक और स्वार्थी होता है। इसके अतिरिक्त तर्जनी की तीन खंडों में पहले खंड के लंबा होने पर व्यक्ति धर्मपरायण, राजनीतिज्ञ या शि़क्षाविद हो सकता है, जबकि दूसरे खंड के लंबा होने पर उसमें सफल कारोबारी के गुण आ सकते हैं। इसी तरह से तीसरे खंड के लंबा होने पर व्यक्ति स्वादिष्ट व्यंजनों का शौकीन होता है।


मंगल क्षेत्र : गुरु पर्वत के नीचे और बुध तथा चन्द्र क्षेत्र के बीच मंगल पर्वत होता है। मंगल प्रथम भौतिक और द्वितीय मानसिक स्थिति को दर्शाता है। मंगल का सामान्य गुण बल, साहस, निर्भयता आदि है। रक्त को उत्तेजित करता है। ऐसे व्यक्ति कठिनाई से विचलित नहीं होते हैं। आलोचना सुनना पसंद नहीं करते। जल्दी गुस्सा हो जाते हैं। दृढ़ स्वभाव के होते हैं। अति विकसित क्षेत्र उग्र स्वभाव का प्रतीक है। मंगल द्वितीय वाले व्यक्ति बुद्धिमान, मेधावी व वैज्ञानिक होते हैं।

शंख से करें ये कमाल के उपाय

पूजापाठ में शंख का महत्त्व सब जानते हैं. शंख का प्रयोग प्राचीन काल से ही होता आया है.महाभारत का युद्ध श्री कृष्ण ने पांचजन्य शंख बजा कर ही किया था. शंख बजाने से न केवल शरीर पर अच्छा प्रभाव पड़ता है बल्कि इसका धार्मिक महत्त्व भी है. वज्ञानिकों का कहना है की शंख बजाने से वातावरण में मौजूद कीटाणुओं का सफाया भी होता है . शंख को घर के पूजा वाले कमरे में ज़रूर रखना चाहिए और रोज बजाइए
शंख से बुरे ग्रहों के प्रभाव को भी दूर किया जा सकता है

👉सोमवार को शंख में दूध भरकर शिवजी को चढ़ाने से चन्द्रमा शुभ और अनुकूल होता है।
👉मंगलवार को शंख बजाकर सुन्दरकांड पढ़ने से मंगल का कुप्रभाव कम होता है।
👉बुधवार को शालिग्रामजी को शंख में जल व तुलसाजी डालकर अभिषेक करने से बुध ग्रह ठीक होता है।
👉शंख का केसर से तिलक कर पूजा करने से भगवान विष्णु व गुरु की प्रसन्नता मिलती है
👉शंख सफेद कपड़े में रखने से शुक्र ग्रह बलवान होता है।
👉शंख में जल डालकर सूर्यदेव को अर्घ्य देने से सूर्यदेव प्रसन्न होते हैं।
👉लक्ष्मी पूजा में शंख की पूजा करने से धन-धान्य तथा ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।


घर में कैसी तस्वीर नहीं लगानी चाहिए... जानिए 

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मत लगाओ घर में ऐसी तस्वीर


भारतीय वास्तुशास्त्र में घर में सकारात्मक ऊर्जा के संचार के लिए पेंटिंग या फोटो लगाते समय न केवल दिशाओं का बल्कि इनके सबजेक्ट का भी विशेष ध्यान रखने की बात की गई है। वास्तुशास्त्र की मान्यताओं के अनुसार आइए जानते हैं घर में कहां और कैसी पेंटिंग लगानी चाहिए:​-

ताजमहल - यद्यपि ताजमहल को दुनियाभर मे प्यार का प्रतीक है परंतु इसके साथ ही वह एक क़बरगाह भी है शाहजहाँ की पत्नी मुमताज़ की। इसलिए घर मे ताजमहल की या उससे संबन्धित कोई भी चीज न रक्खे। इनसे घर मे नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।


ताजमहल दुनियाभर मे प्यार का प्रतीक है परंतु फिर भी वह एक क़बरगाह है शाहजहाँ की पत्नी मुमताज़ की। इसलिए घर मे ताजमहल की या उससे संबन्धित कोई भी चीज न रक्खे।  इनसे घर मे नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

नटराज - नटराज भगवान शिव की एक बड़ी ही खूबसूरत प्रतीकात्मक मूर्ति है परंतु इसे विध्वंस का प्रतीक भी माना है। इसलिए ऐसी फोटो या मूर्ति घर मे बिलकुल भी न रखें।

 नटराज भगवान शिव की एक बड़ी ही खूबसूरत प्रतीकात्मक मूर्ति है परंतु यह एक विध्वंस का भी प्रतीक है। इसलिए ऐसी फोटो या मूर्ति घर मे बिलकुल भी न रखें।


डूबती नाव - डूबती हुई नाव या लहरों मे फसी हुई नाव मन मे नकारतमक व निराशा का भाव पैदा करती है। डूबती नाव अगर घर में रखी हो तो अपने साथ आपका सौभाग्य भी डुबा देती है। इसलिए ऐसी तसवीरों को घर से दूर रखें।

डूबती हुई नाव या लहरों मे फसी हुई नाव मन मे नकारतमक व निराशा का भाव पैदा करती है। इसलिए ऐसी तसवीरों को घर से दूर रखें।

पानी के झरने - पानी के झरने बहाव का प्रतीक हैं. बहते पानी की फोटो घर में हो रहे आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती हैं। वास्तु में मान्यता है कि जिस घर में बहते पानी की फोटो होती हैं, वहां पर धन नहीं टिकता।

जंगली जानवर -  आज-कल जानवरों की पेंटिंग को घर में लगाना चलन में है। देखने में आकर्षित लगने वाली ये फोटो आपके लिए नुकसानदायक साबित हो सकती हैं। किसी जंगली जानवर की फोटो या शो-पीस घर पर रखने से घर में रहने वालों का स्वभाव गुस्से वाला होने लगता है। इससे घर में क्लेश और हिंसा बढ़ती है।इसलिए जानवरों की मूर्ति या फोटो घर मे न रखें

रोते हुआ बच्चा - आज-कल मॉडर्न आर्ट के नाम पर कई अजीब तरह की फोटो चलन में हैं। कई लोगों के घर में रोते हुए बच्चों की फोटो भी सजाई जाती हैं। इस तरह की फोटो घर या दुकान में लगाना बहुत ही अशुभ माना जाता है। बच्चों को सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। बच्चों की रोती हुई फोटो लगाने से दुर्भाग्य बढ़ता है।

शयनयान मे दर्पण - बेडरूम में शीशा नहीं रखना चाहिए. इससे संबंधो मे दरार आ सकती है.

युद्ध के दृश्य - घर मे रामायण और महाभारत के युद्ध संबन्धित तस्वीरें नहीं होनी चाहिए। महाभारत पारिवारिक झगड़े और क्लेश की कहानी है। इससे परिवार के लोगों मे प्रतिद्वंध्ता की भावना विकसित होती है

घर मे रामायण और महाभारत के युद्ध संबन्धित तस्वीरें नहीं होनी चाहिए। इससे परिवार के लोगों मे प्रतिद्वंध्ता की भावना विकसित होती है

कैक्टस या कंटीले पौधे - काँटेदार पौधों का घर मे होना या उसकी तस्वीर का होना भी अशुभ माना गया है। गुलाब के पौधे की तस्वीर भी घर मे नहीं होनी चाहिए।

काँटेदार पौधों का घर मे होना या उसकी तस्वीर का होना भी अशुभ माना गया है। गुलाब के पौधे की तस्वीर भी घर मे नहीं होनी चाहिए।

किन जानवरों की फोटो घर या दुकान में लगाने से बरकत मिलती है